कुछ लोग जमाने में ऐसे भी तो होते हैं
दफ्तर में जो हंसते हैं घर जाकर रोते हैं
बीवी की नजरों में वो अच्छे हैं शौहर
बच्चों के कपड़ों को जो शौक से धोते हैं
जागा किये खिदमत में रातों में जो बीवी के
जाकर के वो दफ्तर में आराम से सोते हैं
पंखों में परिंदों के उड़ने की तमन्ना है
यो बात वो क्या समझें पिंजरे के जो तोते हैं।
पं. सुरेश नीरव
मों.९८१०२४३९६६
Saturday, June 7, 2008
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