Saturday, April 11, 2009

एकांतवास में हड़बड़ी

आज कल मैं एकांतवास में हूँ.
इसलिए नहीं कि मैं उदास हूँ या कर रहा हूँ कोई साधना.
दरअसल मायके गयी हैं मेरी प्यारी ‘भावना’.

हर पति-पत्नी का रिश्ता भी बड़ा अजीब है.
उनकी दूरी से ही पता चलता है वे कितने करीब हैं.
यह सुख कहें या दुःख, मिलना भी एक नसीब है.

यह सिर्फ मैं नहीं हर जोड़ा जानता है.
शादी कर के खुश है यह फिर भी कहाँ मानता है.
सुख को दुःख या फिर उल्टा ही कह रहा जानता है.

दोस्तों, सहकर्मियों ने भी शुरू कर दी हैं चुटकियाँ
ऐसी आजादी हर किसी को बार बार नहीं मिलती.
यार तेरी तो लाटरी लगा गयी ये छुट्टियाँ, “ऐश कर”.

“ऐश” क्या बंदा तो बिपाशा मल्लिका को भी तैयार है.
पर उसकी वापसी पर कैसे कहूँगा कि तुमसे मुझको प्यार है.
फिर सोचता हूँ उनका क्या, एक गया तो दूसरा यार तैयार है.

अभी भी पड़ा हूँ बिस्तर पर उसके इंतजार में
शायद अभी कहेगी “अब उठो भी चाय तैयार है”.
अरे बाप रे, नौ बज गए और मैं बैठा हूँ जैसे इतवार है.

1 comment:

Anonymous said...

यह मेरी पोस्ट है, कृपया ऐसी छिछोरी हरकत ना करें. कृपया इसे जल्द से जल्द हटायें.

http://paricharcha.wordpress.com/2009/04/09/wife-away/